हॉस्टल
बजा अलारम, उठके भागा बाहर देखा लाइन लगी थी
सेंटी मारा, फंडे मारे लेकिन चाल काम न आई
दस मिनट में नंबर आया तब जाके कुछ राहत आयी
जल्दी जल्दी तैयार होके जैसे ही बस दौड़ लगाई
तभी बगल वाले कमरे से बड़ी ज़ोर से आवाज़ आई
MA110 के लेक्चर में प्रोक्सी मार देना अग्गू भाई
बाहर देखा केंटीन में फिर वही लंबी लाइन पाई
खाके भागा कोसते कोसते इंस्टी इतनी दूर क्यूँ बनाई
अटेंडेंस की फाइट न होती हम भी सोते ओड़ रज़ाई
क्लास रूम में जाके देखा Rear Rows तो भरी पड़ी हैं
Front Rows से डर लगता है फिर भी वहीँ बैठना पड़ता है
किसी तरह से क्लासेज सारी मॉर्निंग की तो निकल गयीं हैं
आफ्टरनून में लंच करके अब फाइट हो गयी जगने की
किसी तरह से दस मिनट तक कोशिश करता रहा सुनने की
धीमें धीमें सब शुन्य हो गया आँखों में नींद घिर आई
जब आँख खुली तो सामने देखा दूसरी टीचर कहाँ से आई
बगल वाले से चौंक के पूंछा क्या मांजरा है समझाना भाई
बिना बात Mech. इंजीनियर ने Comp. Sc. की क्लास लगायी
शाम हुयी अब किस की चिंता खेलो कूदो मौज मनाओ
और नहीं तो गप्पें मार के अपनी G. K. और बढ़ाओ
बिना बात की गप्पों में भी साड़ी रात गुज़र गयी है
सोने का सोचा तो देखा ये तो सुबह ही हो गयी हे
नींद की कोई बात नहीं हे क्लासेज में तो सो लेते हैं
पर गप्पें मारना ज़रूरी फंडे क्लियर इसी से होते हैं
तभी बजा फिर से अलार्म उठके देखा सब सपना था
हॉस्टल के दिन बीत गए हैं ये तो Pride Apartment का कमरा था
पर अब भी कुछ बदला नहीं है अभी भी भागना पड़ता है
अभी भी लाइनें लगानी पड़तीं हैं और फंडे क्लियर करने को
गप्पें मारनी पड़तीं हैं
1 comment:
thts really nice one... i'm a final yr. engg student. thts a real nice work....
chetan vikram.
NIT Nagpur.
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