Friday, March 24, 2006

मधुशाला - Madhushaala (Tribute to Shri Harivanshrai Bachchan's Madhusaala)


I am a big fan of Bhachchan Ji's Madhushaala and read it many time in my college days. When I heard about Bhachchan Ji's sad demise on Jan 18th 2003, I wrote this little piece of poem to pay him my humble tribute 



बच्चन जी को श्रद्धांजलि


घर से रोज़ निकलता हूँ में हाँथ लिए खाली प्याला |
    पता नहीं किस मोड़ पे जाके मिल जाएगी मधुशाला ||
                तूं डाल ज़रा सी और साकी, ना देख मेरी आँखों में |
                         दिल उतना ही प्यासा मेरा जितना खाली ये मधुप्याला ||
अमृत कम हे धरती पे तो कहाँ जाये पीने वाला |
            अभी होश ज़रा सा बाकी है तूं बंद मत करना मधुशाला ||



Bachhan Ji Ko Shruddhanjali

Ghar se roz nikalta hun mein    haanth liye khaali pyala
Pata nahin kis mod pe jaake    mil jayegi madhushaala
Tun daal zara si aur saaki    na dekh meri ankhon mein
Dil utna hi pyasa mera    jitna khaali ye madhupyala
Amrut kam he dharti pe    to kahan jaye peene wala
Abhi hosh zara sa baki he    tu band mat karna madhushaala



Friday, March 17, 2006

होस्टल - Hostel

Even years after I left Hostel I had dreams of my Hostel days. This one was a real dream that I had once when I was living in Pride Apartments in Bangalore.




हॉस्टल


बजा अलारम, उठके भागा     बाहर देखा लाइन लगी थी

सेंटी मारा, फंडे मारे     लेकिन चाल काम न आई

दस मिनट में नंबर आया     तब जाके कुछ राहत आयी

जल्दी जल्दी तैयार होके     जैसे ही बस दौड़ लगाई

तभी बगल वाले कमरे से     बड़ी ज़ोर से आवाज़ आई

MA110 के लेक्चर में     प्रोक्सी मार देना अग्गू भाई

बाहर देखा केंटीन में     फिर वही लंबी लाइन पाई

खाके भागा कोसते कोसते     इंस्टी इतनी दूर क्यूँ बनाई

अटेंडेंस की फाइट न होती     हम भी सोते ओड़ रज़ाई

क्लास रूम में जाके देखा     Rear Rows तो भरी पड़ी हैं

Front Rows से डर लगता है     फिर भी वहीँ बैठना पड़ता है

किसी तरह से क्लासेज सारी     मॉर्निंग की तो निकल गयीं हैं

आफ्टरनून में लंच करके     अब फाइट हो गयी जगने की 

किसी तरह से दस मिनट तक     कोशिश करता रहा सुनने की

धीमें धीमें सब शुन्य हो गया     आँखों में नींद घिर आई

जब आँख खुली तो सामने देखा     दूसरी टीचर कहाँ से आई

बगल वाले से चौंक के पूंछा     क्या मांजरा है समझाना भाई

बिना बात Mech. इंजीनियर ने     Comp. Sc. की क्लास लगायी

शाम हुयी अब किस की चिंता     खेलो कूदो मौज मनाओ

और नहीं तो गप्पें मार के     अपनी G. K. और बढ़ाओ

बिना बात की गप्पों में भी     साड़ी रात गुज़र गयी है

सोने का सोचा तो देखा     ये तो सुबह ही हो गयी हे

नींद की कोई बात नहीं हे     क्लासेज में तो सो लेते हैं

पर गप्पें मारना ज़रूरी     फंडे क्लियर इसी से होते हैं

तभी बजा फिर से अलार्म     उठके देखा सब सपना था

हॉस्टल के दिन बीत गए हैं     ये तो Pride Apartment का कमरा था

पर अब भी कुछ बदला नहीं है     अभी भी भागना पड़ता है

अभी भी लाइनें लगानी पड़तीं हैं     और फंडे क्लियर करने को

गप्पें मारनी पड़तीं हैं



जलते जलते - Jalte Jalte (The Burning Down)

It is so hard to accept in your heart that the one who you loved most in your life is not even aware of it. It is harder to handle if you face that person as someone else in your life.



खामोशियों में ज़ब्त थीं यूँ दिल की बातें
कि सुलगता रहा दिल हलके हलके
तब आये वो दिल पे हाँथ रखने
जब ख़त्म हो चूका था ये जलते जलते


Khamoshiyon mein zabt thi yun dil ki batein
Ki sulagta raha dil halke halke
Tab aaye wo dil pe haanth rakhne
Jab khatm ho chuka tha ye jalte jalte


सफ़र

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संघर्ष

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